रोक ना मुझको।

रोक ना मुझको खुद से बात करने से । अपने एहसासों को तो मुझे जताने दे ।। तुझसे करके बात कोई बेढंगी सी । मेरे इश्क़ की खबर तो तुझे बताने दे ।।

वो जो कहतें हैं कि हर एक लड़का कमीना होता है । उन सब के शब्दों को आज चुप कराने दे ।। तुझसे तेरे बारे में और ज़ादा जानकार । मुझे खुद के और करीब आने दे ।।

वाधा करता हूँ कि कभी धोखा नहीं दूंगा । एक बार तो अपना हाथ मेरे हाथों में आजाने दे ।। बड़ी कोशिश की है तुझे अपनी ज़िन्दगी में लाने की । मेरी कोशिश को तो ना यूँ ज़ाया जाने दे ।।

जो है भरोसा अगर तुझे मुझ पर अभी । तो अपने क़दमों को मेरी और बढ़ जाने दे ।। खुशियाँ ही खुशियाँ भर दूँगा ज़िंदगी में तेरी । बस मेरे दर्दों को तुझ्से मुझे छिपाने दे ।।

खित-पिट भी होंगी , तकरारें भी होंगी। पर पूरे हक़ से भी तू मुझे मानाने दे ।। तेरी हर खूबसूरती से करूँ मोहबत मैं । अपने इश्क़ में बस , इस क़दर मुझे खो जाने दे ।।

-कर्मण्य शर्मा ।

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